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अब कुछ स्त्रियां भी बोर हो गई है वही घर का खाना खा- खा कर…!! वो भी शारीरिक सुख को रिश्तों से बढ़कर महत्व दे रही है,,,बस उनका तरीका थोड़ा घातक है…
ऐसे समझिए……
पुरुष का किसी पराई स्त्री से संबंध होगा तो वह अपनी पत्नी से डरेगा और पत्नी और प्रेमिका दोनों को खुश रखने की और उनमें सामंजस्य बिठाने की कोशिश करता है…
जबकि आजकल की स्त्रियां पराए पुरुष से संबंध बनाते ही या तो अपने पति को झूठे केस में फसाने की या फिर उसकी जान से मारने की योजना बनाने लगती हैं..
जबकि वो चाहे तो बिना किसी की जान लिए हुए, बिना किसी के घर के चिराग को बुझाए हुए भी अपने प्रेमी के साथ जा सकती हैं क्योंकि कानून उनको ऐसी आजादी देता है…
हत्या, फिर जेल …और जेल में मस्ती के लिए तरस जाएंगी…बस इतना ही नहीं समझती है कुछ नादान बहनें..
समस्या यही है कि जो कानून महिलाओं की सुरक्षा के लिए बने हैं, उन्हें वो अपनी आजादी समझ कर ग़लत राह पर चल निकली हैं…
स्वेच्छा से लिव इन के नाम पर माता-पिता की इज्जत को खाक में मिलाकर रखैल बन रही है… सीधे सादे पति को झूठे मुकदमे में फंसाकर गुजाराभत्ता ले रही हैं और रातें अपनी यारों संग गुजार रही हैं..
कानून व्यवस्था और न्याय पालिका से जुड़े हर व्यक्ति को पुरुष आयोग के गठन पर विचार करना ही होगा
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श्रीमती मुन्नी देवी दीक्षित प्रधान संपादक