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कानून व्यवस्था की बागडोर संभाले बैठे कुछ थानेदारों की सुस्ती,लाचारी और ढुलमुल रवैये ने
श्रीमती- मुन्नी देवी दीक्षित ,प्रधान संपादक?
अलीगढ़ पुलिस को जनता की अदालत के कटघरे में खड़ा कर दिया है, हाल ही में तमाम ऐसे मामले सामने आये है जिसमें साफतौर से थानेदारों की उदासीनता देखी गयी है,
गांधीपार्क में हाल ही में हुई एक घटना जिसमें हत्या को एक्सीडेंट में दर्शाने का प्रयास किया जा रहा है,सूत्रों के अनुसार थानेदार ने मोटी रकम लेकर मुकदमा तो हत्या का दर्ज कर लिया लेकिन तफ्तीश के नाम पर केवल हिलाहवाली की जा रही है घटना से संबंधित कई साक्ष्य भी मौजूद है,
बीते सप्ताह क्वार्सी थाना क्षेत्र से एक नाबालिग लड़की को एक कैब ड्राइवर भगा ले गया,तहरीर पर मुकदमा भी दर्ज हुआ लेकिन कार्रवाई के नाम पर पुलिस खामोश बैठी है,नाबालिग लड़की की मां का रो-रोकर बुरा हाल है लड़की के मामा ने सोशल मीडिया पर भी तमाम गुहार लगाई लेकिन मजाल है लड़की आज तक बरामद हुई हो,
दूसरी घटना छर्रा थाना क्षेत्र की है जिसमें एक शादीशुदा युवक एक लड़की को जबरन कार में डालकर ले गया जिसका सीसीटीवी भी सामने आया लेकिन लड़की की बरामदगी आज तक नहीं हुई है,महुआखेड़ा भूमिया कांड में बड़े मगरमच्छों को पुलिस आज तक नहीं पकड़ पाई,सराय हकीम में हुए गोली कांड में आज तक कई चेहरे खुलेआम बेखौफ घूम रहे है,
पीड़ित जब किसी थाने की चौखट पर अपनी गुहार लेकर पहुँचता है, तो उसे न्याय की उम्मीद कम और थानेदार के तीखे तेवर या “कल आना” का आश्वासन ज़्यादा मिलता है। एफआईआर दर्ज कराने के लिए पीड़ित को थानों के चक्कर काटने पड़ते हैं