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लेखक=रोहतास दीक्षित उप संपादक
उत्तर प्रदेश में आज पुलिस खुद गैरकानूनी व्यवहार कर रही है। जिस पुलिस का काम कानून की रक्षा करना था, वही आज खुद अपराध कर रही है। देवरिया के गौरी बाजार थाने का मामला इसका सबसे ताजा और शर्मनाक उदाहरण है, जहाँ चार लोगों को 10-10 दिन तक अवैध हिरासत में रखा गया और फिर सीसीटीवी खराब होने का झूठा बहाना बनाया गया।
पुलिस को अपराधी बनाने का पूरा श्रेय बिष्ट ठाकुर मुख्यमंत्री आदित्यनाथ बिष्ट और भाजपा सरकार को जाता है। यह सरकार पुलिस से कानून की स्थापना नहीं करवाती, बल्कि गुंडागर्दी करवाती है। यह लोग पुलिस से अपराध करवाते हैं, अपने विरोधियों को निपटवाते हैं।
इसी कारण आज उत्तर प्रदेश की पुलिस तानाशाह हो चुकी है। उसे न संविधान का डर है, न माननीय न्यायालय का। जब इलाहाबाद हाईकोर्ट को कहना पड़े कि पुलिस ‘झूठों का झुंड’ है, जब कोर्ट को कहना पड़े कि “कोर्ट से माफी मत मांगिए, लोगों से माफी मांगिए” – तो समझ लीजिए कि व्यवस्था कितनी सड़ चुकी है।
कोर्ट ने जब सीसीटीवी फुटेज मांगी तो पुलिस ने कहा कैमरा खराब है, जीडी में एंट्री तक नहीं। 46 लाख रुपये जारी होने के बाद भी थानों में कैमरे नहीं लगते, पैसा खा लिया जाता है। यह सब बिना ऊपर के संरक्षण के संभव नहीं है।
उत्तर प्रदेश आज भयंकर जंगल राज की चपेट में है और यह पिछले 10 वर्षों के भाजपा शासन काल में स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
माननीय न्यायालय की कड़ी फटकार और कठोर टिप्पणी भाजपा सरकार एवं मुख्यमंत्री आदित्यनाथ बिष्ट ठाकुर के माथे पर एक बड़ा कलंक है। यह टिप्पणी सिर्फ एक थानेदार पर नहीं, बल्कि पूरी सरकार की कार्यशैली पर है।