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सिर्फ़ 20 साल की उम्र एक किसान की बेटी है एक छोटे से गांव की साधारण लड़की, जिसने दसवीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी. लेकिन 27 सितंबर 2009 की रात उसने जो किया, वह इतिहास बन गया.
उस रात समर्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के तीन हथियारबंद आतंकवादी उसके घर में घुस आए. उनका मकसद था रुखसाना को जबरन अपने साथ ले जाना.
जब उसके पिता ने विरोध किया तो आतंकियों ने उसके पिता, मां और भाई को बंदूकों के कुंदों से बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया.
रुखसाना एक चारपाई के नीचे छिपी हुई थी. वह अपने परिवार की चीखें सुन रही थी. लेकिन उसने डर के आगे झुकने के बजाय लड़ने का फैसला किया.
कमरे में रखी एक कुल्हाड़ी उठाकर वह अचानक बाहर निकली और आतंकियों के कमांडर के सिर पर वार कर दिया. कमांडर लड़खड़ा गया. रुखसाना ने उसकी राइफल छीन ली और उसी की बंदूक से उसे ढेर कर दिया.
फिर उसने दूसरी बंदूक अपने भाई की ओर फेंकी. दोनों भाई-बहन ने मिलकर बाकी दो आतंकियों पर फायरिंग कर दी, जो जान बचाकर अंधेरे में भाग निकले.
जिस आतंकी को रुखसाना ने मार गिराया, उसका नाम अबू ओसामा था. जो लश्कर-ए-तैयबा का एक कुख्यात कमांडर, जिसकी तलाश सुरक्षा एजेंसियां वर्षों से कर रही थीं.
जिस लड़की ने कभी जिंदगी में बंदूक तक नहीं पकड़ी थी, उसने अपनी बहादुरी से एक वांछित आतंकी को खत्म कर अपने पूरे परिवार की जान बचा ली.
देश ने उसकी वीरता को सलाम किया और उसे भारत के सर्वोच्च वीरता सम्मानों में से एक कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया. बाद में रुखसाना खुद पुलिस बल में शामिल हुईं और कांस्टेबल बनीं.
वक़्त का इंसाफ़ देखिए आतंकी उसे उसके घर से उठाकर ले जाने आए थे… लेकिन उस रात घर वापस न लौटने वाला उनका कमांडर था.