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अदालत ने कहा कि लोग अक्सर दूध या आर्थिक उपयोगिता खत्म होने के बाद पशुओं को सड़कों पर लावारिस छोड़ देते हैं और उनकी सुरक्षा की परवाह नहीं करते, लेकिन यदि कोई व्यक्ति अपनी या अपने परिवार की भूख मिटाने के लिए उनका भोजन के रूप में इस्तेमाल करता है, तो लोग इसे बेहद आपत्तिजनक मानते हैं।
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने आवारा पशुओं से होने वाले सड़क हादसों के गंभीर मुद्दे पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। कोर्ट ने आवारा मवेशियों से जुड़ी दुर्घटनाओं के बड़े मुद्दे की जांच करते हुए और इस समस्या से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को उपाय सुझाते हुए यह बात कही।
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कहा कि जो मालिक जानवरों को पालते हैं, उन्हें आदर्श रूप से जीवन भर उनकी देखभाल करनी चाहिए। बेंच ने कहा, “हमने पहले ही उपयोगिता खत्म होने पर जानवरों को छोड़ दिए जाने के मुद्दे पर बात की है।
एक आदर्श दुनिया में ऐसा नहीं होता। जो लोग किसी जानवर को घर लाते हैं, उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जीवन भर उनकी देखभाल की जाए। लेकिन सच्चाई यह है कि हम एक बहुत ही दोषपूर्ण, इंसानी दुनिया में रहते हैं।”
सामाजिक विरोधाभास को उजागर करते हुए कोर्ट ने कहा: “शायद यह इस दोषपूर्ण दुनिया की एक विशेषता है कि एक तरफ तो हम उन्हें उनकी सुरक्षा की परवाह किए बिना घूमने देते हैं, और दूसरी तरफ, अगर कोई व्यक्ति अपना या अपने परिवार का पेट भरने के लिए उनका इस्तेमाल करता है तो हमें यह बहुत बुरा लगता है।”
कानूनों का सख्त पालन: राज्यों में मौजूद पशु संरक्षण कानूनों का सही और प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
यह फैसला संगरूर (पंजाब) की रहने वाली एक महिला (निशा बनाम नगर परिषद संगरूरकी याचिका पर आया। वर्ष 2007 में महिला के पति की एक आवारा सांड़ के हमले में मौत हो गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता विधवा महिला की अपील स्वीकार करते हुए उन्हें ₹15 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया। साथ ही अदालत ने इस व्यक्तिगत मामले का दायरा बढ़ाते हुए देश में आवारा पशुओं से जुड़ी व्यापक समस्याओं और सार्वजनिक सुरक्षा पर दूरगामी सिफारिशें जारी कीं।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि फ़ैसले की एक कॉपी सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को भेजी जाए ताकि वे इन सुझावों पर विचार कर सकें।
(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और कानूनी मामलों के जानकार हैं।)