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कहते हैं कि राजनीति की बिसात पर जब मोहरें खुद को वज़ीर समझने लगें, तो समझ लेना चाहिए कि शह और मात का असली खेल बस शुरू ही होने वाला है ..
अभी सात दिन भी नहीं बीते थे .. दिल्ली के बंद कमरों से लेकर टीवी स्टूडियोज के चमचमाते कैमरों तक, एक ही शोर था—”यह सरकार बैसाखियों पर है .. एक साल में मोदी सरकार गिर जाएगी, मोदी जी को इस्तीफा देकर भागना पड़ेगा!”
दावे बड़े थे, छातियां चौड़ी थीं और स्क्रिप्ट पूरी तरह तैयार थी .. लेकिन फिर .. कालचक्र घूमा .. सिर्फ 168 घंटों के भीतर परदे के पीछे कुछ ऐसा हुआ कि जो लोग दूसरों के घर गिराने के सपने देख रहे थे, आज उनके खुद के आशियाने पर अपनों ने ही बुलडोजर चला दिया है!
आइए खोलते हैं इस महा-थ्रिलर के वो पन्ने, जो आपको हैरान कर देंगे ..
कहानी की शुरुआत होती है, तथाकथित ‘मजबूत’ विपक्षी गठबंधन (INDI Alliance) की उस हाई-प्रोफाइल बैठक से, जहाँ सरकार को गिराने का अंतिम ब्लूप्रिंट तैयार होना था .. मेज सजी थी, पानी के गिलास रखे थे, लेकिन जब नजरें घूमीं तो सन्नाटा पसर गया ..
DMK .. गायब!
आम आदमी पार्टी (AAP) .. गायब!
शिवसेना (UBT) .. गायब!
सस्पेंस तब गहरा गया जब केवल बैठक से दूरी ही नहीं बनी, बल्कि #DMK और #AapParty ने गठबंधन से अपने रास्ते अलग करने की औपचारिक घोषणा कर दी ..
ऋग्वेद का ‘संगठन सूक्त’ कहता है—”समानं मनः सह चित्तमेषाम्” (अर्थात जब तक मन और उद्देश्य एक न हों, संगठन टिक नहीं सकता) .. यहाँ उद्देश्य देश-निर्माण नहीं, सिर्फ एक व्यक्ति का विरोध था ..नतीजा ..? ताश के पत्तों की तरह बिखर गया वो कुनबा ..
लेकिन असली ‘क्लाइमेक्स’ अभी बाकी था ..
जब विपक्ष दिल्ली में बिखर रहा था, तब पश्चिम बंगाल के सियासी गलियारों में एक खामोश बवंडर उठ रहा था .. ममता बनर्जी के सबसे मजबूत किले (TMC) के भीतर एक ऐसी पटकथा लिखी जा चुकी थी, जिसकी भनक चाणक्य नीति के धुरंधरों को भी नहीं लगी ..
#TMC के 29 सांसदों में से 20 से ज्यादा सांसदों ने एक साथ, एक ही वक्त पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक गोपनीय पत्र सौंप दिया .. पत्र में जो लिखा था, उसने विपक्ष के पैरों के नीचे से जमीन खिसका दी .. उन सांसदों ने खुलेआम एनडीए (NDA) और मोदी सरकार को बिना शर्त समर्थन देने का ऐलान कर दिया .
यह राजनीति का वो ‘विभीषण प्रसंग’ था, जहाँ जब नेतृत्व केवल अपनी जिद और अहंकार में डूब जाता है, तो उसके अपने ही लोग राष्ट्र की स्थिरता के लिए पाला बदल लेते हैं ..
जो लोग एक हफ्ते पहले तक सरकार गिरने की तारीखें दे रहे थे, वे अब कैलकुलेटर लेकर बैठे हैं ..
1. पहले का आंकड़ा: NDA के पास 293 सीटें थीं (जो बहुमत से पार थीं) ..
2. TMC के झटके के बाद: यह संख्या बढ़कर 313 हो गई! यानी सरकार अब पहले से कहीं ज्यादा वज्र जैसी मजबूत हो चुकी है ..
3. अगला सस्पेंस: कयासों का बाजार गर्म है कि यदि DMK के 22 सांसद भी इसी हवा के रुख को भांपते हुए (जिसकी पूरी
संभावना है) समर्थन दे देते हैं, तो यह आंकड़ा 335 पार कर जाएगा ..
यह महाभारत के उस दृश्य जैसा है, जहाँ कौरवों के पास 11 अक्षौहिणी सेना का ‘घमंड’ तो था, लेकिन पांडवों के पास श्रीकृष्ण की नीति और अर्जुन का अटूट संकल्प था .. जीत अंततः ‘धर्म’ और ‘स्थिरता’ की ही होती है ..
इस पूरे ड्रामे के केंद्र में जो व्यक्ति बैठा है, वह शांत है .. भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है ..
“दुःखेष्वनुद्विग्नमनाः सुखेषु विगतस्पृहः” (जो परिस्थितियों से विचलित न हो, वही स्थिर बुद्धि है) ..
जब विरोधी रोज़ सुबह उठकर पतन की भविष्यवाणियाँ कर रहे थे, अपशब्द कह रहे थे, तब वह कर्मयोगी चुपचाप अपनी नीति पर काम कर रहा था .. आज नतीजा सबके सामने है .. जो सिर्फ भौंक सकते हैं, वे आज भी सिर्फ शोर मचा रहे हैं; और जो राज करने के लिए पैदा हुआ है, उसका राज और मजबूती से चल रहा है ..
साफ संदेश है: जो मोदी सरकार को गिराने निकले थे, आज उनके खुद के घरवालों ने उनके मंसूबों पर बुलडोजर चला दिया है .. ? (लेखक) रोहितस उर्फ अजय दीक्षित ?