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असली और जमीनी हकीकत से जुड़ा बड़ा ही गम्भीर और गहन विचार करके बड़ा ही गहरा सवाल है (मैं अपनी समझ और याददाश्त के अनुरूप जवाब देता हूं साल (2006) से पहले पुलिस पर कोई लगाम और अंकुश नहीं था लेकिन साल (2006)में कांग्रेस के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार में कानून बना कि पुलिस वाला ना तो किसी का उत्पीड़न (मार पीट) नहीं कर सकता और अगर किसी की भी किसी मामले में कोई गिरफ्तारी होती है तो उसे (24घण्टे के अन्दर ही कोर्ट में जज के सामने पेश किया जाए/और अगर किसी भी इंसान ने कोई जुर्म किया है और उसकी सजा सात साल तक है तो उसे जेल में भेजने की जरूरत नहीं है उसे कोर्ट में जमानत करवाने तक कच्ची जमानत थाने से ही मिल जायेगी/और पुलिस और जनता से जुड़े कानूनों को सर्वजन हित के लिए आपके और मेरे जैसे लोगो को आगे आकर इन सबकी जानकारी को अधिक से अधिक हिंदी में जानना होगा इसमें (आपका स्मार्ट फोन) आरटीआई कार्यकर्ता (बड़े ही दुख की बात है कि इस देश के ज्यादातर लोग आरटीआई लगाने के नियम ही नहीं जानते ग्रैजुएट लोग भी) और समाजसेवी संस्थाओं को और गूगल सर्च जैसे शानदार प्लेटफार्म की मदद अनिवार्य है/पुलिस और जनता के कानूनों को जानना होगा कानूनों की जानकारी का अभाव ही पुलिस अत्याचार की जननी है