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आर्मी सीमा पर दुश्मन से लड़ती है, पुलिस अपनों के बीच में रहती है

ये सवाल सिर्फ वर्दी का नहीं, हमारे मनोविज्ञान का है।

दोनों वर्दियां खाकी-जैसी नहीं, एक ही रंग की नहीं हैं, पर दोनों का काम देश और समाज की रक्षा करना है। फिर भी एक को देखते ही दिल में गर्व आता है और दूसरी को देखते ही दिल में घबराहट होती है। ऐसा क्यों?

1 आर्मी सीमा पर दुश्मन से लड़ती है, पुलिस अपनों के बीच में रहती है -*

आर्मी का दुश्मन बाहर है – पाकिस्तान, चीन, आतंकवादी। वो हमारे लिए जान देती है, इसलिए उसके प्रति कृतज्ञता है। पुलिस का सामना रोज़ हमसे ही होता है – चालान, थाने, जांच, FIR। जहाँ रोज़ का टकराव है, वहाँ सम्मान की जगह डर और लेन-देन की बात आ जाती है।

*2. आर्मी से हमारा वास्ता परोक्ष है, पुलिस से प्रत्यक्ष -*

आर्मी को हम टीवी पर, परेड में, कारगिल की कहानियों में देखते हैं। पुलिस को हम तब देखते हैं जब हमारी गलती हुई हो या हम पर कोई आरोप लगा हो। जब भी पुलिस दिखती है, मन में एक ही सवाल आता है – “कहीं मुझे तो नहीं रोक रहे?”

*3. आर्मी में त्याग दिखता है, पुलिस में अधिकार दिखता है -*

आर्मी का जवान -40 डिग्री में सियाचिन में खड़ा है, परिवार से दूर है। उसका त्याग दिखता है। पुलिस का अधिकार दिखता है – डंडा, चालान बुक, हवालात। त्याग हमेशा सम्मान पैदा करता है और अधिकार हमेशा डर पैदा करता है।

*4. व्यवस्था का फर्क -*

सच ये भी है कि आर्मी में भ्रष्टाचार की खबरें बहुत कम आती हैं। पुलिस में कई बार आम आदमी को लगता है कि बिना पैसे या सिफारिश के FIR नहीं लिखी जाएगी, चालान माफ नहीं होगा। जब वर्दी के साथ ईमानदारी पर शक आ जाए तो सम्मान डर में बदल जाता है। जैसा मेरे अपने मामले में हुआ – *अपराध संख्या 229/2021 और 0319/2023* में ऑन-ड्यूटी ड्राइवर होते हुए भी मुझे फर्जी बैनामे में फंसाया गया। ऐसी घटनाएं पुलिस की छवि खराब करती हैं।

तो समाधान क्या है?

डर का सम्मान, सम्मान नहीं होता। पुलिस को भी आर्मी की तरह जनता की पुलिस बनना होगा।

जब थाने में एक गरीब आदमी बिना डरे अपनी शिकायत लिखवा सकेगा, जब सिपाही चालान काटने से पहले समझाएगा, जब वर्दी वाला रक्षक लगेगा भक्षक नहीं – तब लोग पुलिस को भी उसी गर्व से सलाम करेंगे जैसे आर्मी को करते हैं।

वर्दी का रंग सम्मान नहीं दिलाता, वर्दी के पीछे का चरित्र दिखाता है।

लेखक = श्रीमती मुन्नी देवी दीक्षित * प्रधान संपादक

रोहतास उर्फ अजय दीक्षित

*ग्राम बिछोरागंग  अलीगंज  एटा नही  , कर्मभूमि – परिवहन विभाग 

 

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