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अलीगढ़, 4 सितंबर – खबर का असर!
अपने अधिकार जानिये साप्ताहिक समाचार पत्र द्वारा प्रकाशित खबर का बड़ा असर सामने आया है। जमानत पर रिहा होने के बाद भूमि संबंधी कागजों के सत्यापन में हो रही देरी को लेकर *उपसंपादक रोहतास उर्फ अजय दीक्षित* ने पिछले अंक में सवाल उठाते हुए मांग की थी कि गरीब किसान और ग्रामीणों के जमीन के दस्तावेजों का सत्यापन समयबद्ध रूप से कराया जाए।

समाचार प्रकाशित होने के बाद प्रशासन हरकत में आ गया । राजस्व विभाग ने तत्काल आदेश जारी करते हुए निर्देश दिया कि जमानत प्राप्त मामलों में भूमि के कागजों का सत्यापन प्राथमिकता के आधार पर एक सप्ताह के भीतर पूरा किया जाए।
इसी क्रम में योगी सरकार ने राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों को लेकर 4 तहसीलदार समेत 5 अफसरों को निलंबित कर अनुशासनिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
उपसंपादक रोहतास उर्फ अजय दीक्षित ने कहा:* “अक्सर जमानत के बाद गरीब परिवारों को जमीन के अभिलेखों के लिए तहसील और लेखपाल कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं। कागजों की जांच में महीनों की देरी से गरीबों का आर्थिक नुकसान होता है।”
संपादकीय टिप्पणी:* यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता समाज में बदलाव लाने का सशक्त माध्यम है।