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फर्जी आधार कार्ड से TC बनवाकर POCSO एक्ट में फंसाने का आरोप – 3 माह से दिव्यांग का इकलौता बेटा जेल में, जांच रिपोर्ट के बाद भी कार्रवाई शून्य*
मुरादाबाद / भगतपुर।* उत्तर प्रदेश में योगी सरकार भले ही जीरो टॉलरेंस और दिव्यांगों को न्याय दिलाने के बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। जिला मुरादाबाद के थाना भगतपुर क्षेत्र में न्याय व्यवस्था जिम्मेदार अधिकारियों की चौखट पर दम तोड़ती नजर आ रही है।
एक दिव्यांग महिला पिछले तीन माह से अपने इकलौते पुत्र को छुड़ाने के लिए अफसरों के दरवाजे पर माथा टेक रही है, लेकिन न्याय के नाम पर उसे सिर्फ ठेंगा मिल रहा है।
क्या है पूरा मामला?*
पीड़ित दिव्यांग महिला का आरोप है कि मुकदमा वादी ने फर्जी आधार कार्ड के आधार पर फर्जी टीसी बनवाकर उसके नाबालिग बेटे के खिलाफ पॉक्सो एक्ट में झूठा मुकदमा दर्ज करा दिया। जिसके आधार पर पिछले 03 माह से उसका इकलौता पुत्र जिला जेल में निरुद्ध है।
2 आधार कार्ड का खेल!*
पीड़िता का सबसे बड़ा दावा है कि मुकदमा वादी के पास 2-2 आधार कार्ड हैं। एक असली उम्र वाला और दूसरा कम उम्र दिखाने वाला फर्जी आधार, जिससे फर्जी टीसी बनवाकर बेटे को पॉक्सो जैसे गंभीर कानून में फंसा दिया गया। पीड़िता ने दोनों आधार कार्डों के सबूत जांच अधिकारी को सौंप दिए हैं।
जांच आख्या के बाद भी कार्रवाई शून्य – क्यों?*
सबसे बड़ा सवाल यहीं खड़ा होता है। पीड़िता के अनुसार जांच अधिकारी द्वारा जांच आख्या प्रस्तुत की जा चुकी है, जिसमें फर्जीवाड़े की बात सामने आई है, बावजूद इसके आरोपी वादी पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। क्या फर्जी आधार और फर्जी टीसी बनवाना अपराध नहीं है? अगर जांच में फर्जीवाड़ा साबित हो गया तो आरोपी पर कार्रवाई करने से जिम्मेदार अधिकारी क्यों कतरा रहे हैं?
*2 बार DIG, 3 बार SSP से गुहार – फिर भी मौन*
न्याय की आस में यह दिव्यांग महिला 2 बार @digmoradabad रेंज मुरादाबाद और 3 बार SSP @moradabadpolice मुरादाबाद के कार्यालय के चक्कर लगा चुकी है। हर बार सिर्फ आश्वासन मिला – “जांच कराते हैं”, लेकिन कार्रवाई के नाम पर आज तक ठेंगा।
अब सवाल ये है कि जब एक दिव्यांग महिला को ही न्याय के लिए इतना भटकना पड़ रहा है तो आम आदमी का क्या होगा?
अपने अधिकार जानिए की मांग -*
1. मुकदमा वादी के दोनों आधार कार्डों की UIDAI से तत्काल जांच हो।
2. फर्जी TC की जांच बेसिक शिक्षा अधिकारी से कराई जाए।
3. जांच आख्या सार्वजनिक हो और अगर फर्जीवाड़ा है तो POCSO एक्ट के दुरुपयोग और फर्जी दस्तावेज बनाने के आरोप में वादी पर तत्काल FIR दर्ज हो।
4. दिव्यांग महिला के बेटे को न्याय मिले।
नोट: यह खबर पीड़ित दिव्यांग महिला द्वारा प्रस्तुत प्रार्थना पत्रों, आधार कार्ड की प्रतियों और SSP/DIG कार्यालय में दिए गए शिकायती पत्रों पर आधारित है। ‘अपने अधिकार जानिए’ किसी पर दोष सिद्ध नहीं करता, बल्कि निष्पक्ष जांच की मांग करता है।*
*प्रधान संपादक: मुन्नी देवी दीक्षित