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अलीगंज, एटा।* हाईकोर्ट के आदेश के बाद पंचायत चुनाव की घोषणा होते ही गांव-गांव में सरगर्मी तेज हो गई है। ग्राम पंचायत का चुनाव सबसे ज्यादा जमीनी स्तर का चुनाव होता है। यहाँ हर मतदाता के दिल में एक हिसाब होता है – किसने कब, कहाँ अपमान किया, किसने साथ दिया और किसने धोखा दिया।
लेकिन इस चुनाव को जीतने के लिए कुछ प्रत्याशी किस हद तक गिर जाते हैं, इसका एक कड़वा सच 5 साल पहले तहसील अलीगंज के ही एक गांव में देखने को मिला।
जीत के लिए फर्जी कुछ तक कर दिया*
बताया जाता है कि प्रधानी जीतने के लिए एक प्रत्याशी के परिवारजनों ने दूसरे प्रत्याशी को हराने के लिए फर्जी कुछ तक करा दिया। सारे दोस्त मिल गए, चुनाव जीत लिया और उसके बाद पूरा दोष किसी और निर्दोष पर डाल दिया।
और फिर वही कहावत सच हो गई – *सैंया भये कोतवाल तो डर काहे का।*
प्रधान बनते ही पूरे गांव का मुखिया बन जाता है। फिर उसकी बात पुलिस भी मानती है, विधायक भी सुनते हैं और सांसद भी। यही प्रधान का दबदबा है, और इसी दबदबे का गलत इस्तेमाल कई जगह होता है।
सवाल ये है – क्या इस बार चुनाव में जनता ऐसे हथकंडों को समझेगी?*
अपने अधिकार जानिए की टीम सभी मतदाताओं से अपील करती है कि अपने अधिकार को समझें, किसी के बहकावे में न आएं और सही, ईमानदार और गांव का विकास करने वाले को ही चुनें।
मुन्नी देवी दीक्षित, प्रधान संपादक अलीगढ ?