Popular Posts

दशहरा पर नीलकंठ के दर्शन का है विशेष महत्व, मान्यता है कि पूरी होती है हर मनोकामना

शास्त्रों में भगवान शिव का रूप माना जाता है नीलकंठ पक्षी को*

गोपी = अकराबाद, अलीगढ।* विजयादशमी यानी दशहरा पर नीलकंठ पक्षी के दर्शन को शास्त्रों में अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है। मान्यता है कि दशहरा के दिन नीलकंठ के दर्शन करने से जीवन के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है।

क्या है पौराणिक मान्यता?*

पौराणिक कथाओं के अनुसार नीलकंठ पक्षी को भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है। कहा जाता है कि भगवान राम ने रावण का वध करने से पूर्व नीलकंठ पक्षी के दर्शन किए थे। वहीं एक अन्य कथा के अनुसार जब भगवान शिव ने समुद्र मंथन से निकला हलाहल विष पिया था तो उनका कंठ नीला हो गया था। उसी स्वरूप से नीलकंठ पक्षी की उत्पत्ति मानी जाती है।

रामायण काल में यह भी मान्यता है कि दशहरे के दिन नीलकंठ पक्षी ने भगवान राम को रावण के वध का शुभ समाचार दिया था, इसलिए इस दिन इसके दर्शन को विजय का प्रतीक माना जाता है।

*शास्त्रों में क्या लिखा है?*

विद्वानों के अनुसार दशहरे के दिन नीलकंठ के दर्शन के बाद ही लोग रावण दहन देखते हैं। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन नीलकंठ पक्षी को देखकर “कू-कू” कहना और अपनी मनोकामना मांगना शुभ होता है। किसान इस दिन नीलकंठ के दिखने को अच्छी फसल का संकेत भी मानते हैं।

इस दिन लोग सुबह-सुबह खेतों और खुले आसमान में नीलकंठ पक्षी के दर्शन के लिए निकलते हैं। हालांकि अब नीलकंठ पक्षी दुर्लभ होते जा रहे हैं, इसलिए इसका चित्र या तस्वीर देखना भी उतना ही शुभ माना जाता है।

यह खबर धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों पर आधारित है।*

अपने अधिकार जानिये समाचारपत्र ?

मुन्नी देवी दीक्षित = प्रधान संपादक *गोपी *अकराबाद अलीगढ ?

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *