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पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार की अनुपस्थिति को लेकर, इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी:

सरकारी तंत्र का दुरुपयोग कर रहे पुलिस अधिकारी, बिना जानकारी के अफसरों को कोर्ट भेजने पर HC ने जताई कड़ी नाराजगी इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अदालत की कोई सहायता न कर पाने वाले इन अधिकारियों को प्रयागराज आने के लिए कोई यात्रा भत्ता, दैनिक भत्ता या अन्य सरकारी सुविधा नहीं दी जाएगी।

इलाहाबाद हाईकोर्ट में जस्टिस हरवीर सिंह की पीठ श्याम बाबू और अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले की सुनवाई कर रही थी।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने पिछले आदेश के अनुपालन में रिपोर्ट दाखिल करने में लगभग एक साल की देरी होने पर आगरा के पुलिस कमिश्नर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने और स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया था।लेकिन पुलिस कमिश्नर ने एक पत्र भेजकर अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश की और खुद पेश होने के बजाय हाजिरी माफी की अर्जी लगा दी।

आगरा के पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार की जगह अदालत में सहायता के लिए अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर शचींद्र पटेल और सहायक पुलिस कमिश्नर गौरव सिंह मौजूद थे। जब अदालत ने इन दोनों अधिकारियों से केस के तथ्यों के बारे में पूछा, तो दोनों ने बेहद ईमानदारी से स्वीकार किया कि उन्हें इस मामले की कोई जानकारी नहीं है और वे अपनी तैनाती के दौरान कभी भी इस केस से नहीं जुड़े रहे।

अधिकारियों के इस जवाब पर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे सरकारी तंत्र का अनुचित उपयोग करार दिया। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि जब अधिकारियों को मामले की कोई जानकारी ही नहीं है, तो उनकी पूरी फौज को अदालत में भेजना पूरी तरह से व्यर्थ है।

अदालत ने आदेश दिया कि अदालत की कोई सहायता न कर पाने वाले इन अधिकारियों को प्रयागराज आने के लिए कोई यात्रा भत्ता, दैनिक भत्ता या अन्य सरकारी सुविधा नहीं दी जाएगी।

​हाईकोर्ट ने आगरा के पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार की हाजिरी माफी की अर्जी खारिज कर दी है। अदालत ने उन्हें अपने आचरण को स्पष्ट करने के लिए व्यक्तिगत रूप से पेश होने का एक और मौका दिया है। साथ ही यह सख्त चेतावनी भी दी है कि यदि वह अगली सुनवाई पर अदालत की सहायता के लिए पेश नहीं होते हैं, तो अदालत मजबूर होकर उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को तलब करेगी। मामले की अगली सुनवाई आठ सितंबर , 2026 के लिए तय की गई है

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