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90 के दशक में समाजवादियों की अय्याशी पर मशहूर शायर अदम गोंडवी ने लिखा था।

काजू भुने पलेट में, विस्की गिलास में

उतरा है रामराज विधायक निवास में

पक्के समाजवादी हैं, तस्कर हों या डकैत

इतना असर है ख़ादी के उजले लिबास में”

वह तो अच्छा था कि अदम गोंडवी साहब सैफई महोत्सव नहीं देख पाए।

मुलायम यादव 5 साल सत्ता में रहे और अखिलेश यादव 5 साल सत्ता में रहे और इन 10 सालों के दौरान हर साल मुंबई से उत्तर प्रदेश सरकार के सरकारी विमान से और दूसरे आलीशान कारपोरेट जेट भाड़े पर लेकर सलमान खान कैटरीना कैफ रणबीर कपूर माधुरी दीक्षित अमिताभ बच्चन शिल्पा शेट्टी से लेकर पूरे बॉलीवुड को एक छोटे से गांव सैफई में बुलाया जाता था जो मुलायम यादव का पैतृक गांव है और फिर 15 दिनों तक उस गांव में शराब शबाब और कबाब की महफिले सजती थी।

समाजवादी लोग हाथ में दारू का गिलास लिए मुर्ग मुसल्लम का चखना लिए फिल्मी तारिकाओं का डांस देखकर समाजवाद को मजबूत करते थे।

और इस महोत्सव के बारे में यहां तक भी खबरें हैं कि सिर्फ डांस ही नहीं आगे बहुत कुछ होता था और तो और इनकी बेहयाई और बेशर्मी देखिए आरटीआई से जब पूछा जाता था कि समाजवाद के इस नंगे नाच पर आपने कितना पैसा सरकारी खजाने से खर्च किया है तब यह आरटीआई से जवाब नहीं देते थे और जो कोई हाईकोर्ट में अपील करता था उसे गोली मार दी जाती थी।

इन्होंने 4 आरटीआई कार्यकर्ताओं की हत्या करवा दी थी जिन्होंने सैफई महोत्सव का खर्च जानने की कोशिश की।

वह दहशत भरा दौर याद करिए और फिर मुलायम सिंह यादव के दौर के बाद जब मायावती आई तब उन्होंने यह खर्च बताया कि मुलायम सिंह यादव के पांच सैफई महोत्सव पर 18000 करोड रुपए खर्च हुआ और योगी सरकार ने बताया अखिलेश यादव के सैफई महोत्सव पर ₹34000 करोड़ सरकारी खजाने से खर्च हुआ और यह सब पैसे भाड़े पर कारपोरेट देने वाले तथा मुंबई के अमीर फिल्मी दुनिया के सितारों पर खर्च कर दिए गए।

अखिलेश यादव का यही असली समाजवाद है।

आप यह फोटोग्राफ देखिए किस तरह से मुंबई की पूरी फिल्मी दुनिया को सरकारी पैसे के दम पर अखिलेश यादव और मुलायम यादव उतार देते थे और फिर समाजवादी शराब शबाब और कबाब का दौर चलता था जाम से जाम टकराते थे चखना का आदान प्रदान होता था।

लेखक=  रोहतास उर्फ अजय दीक्षित

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