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इलाहाबाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 25 मई 2026 के शासनादेश को बताया वैध – जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद ने सुनाया फैसला*
प्रयागराज।* इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्राम पंचायतों को लेकर दाखिल याचिकाओं पर बड़ा फैसला सुनाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को 3 महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने का आदेश दिया है।
जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की डिवीजन बेंच ने यह अहम फैसला सुनाया।
क्या था पूरा मामला?*
दरअसल ग्राम पंचायतों का 5 साल का कार्यकाल खत्म होने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 25 मई 2026 को शासनादेश जारी कर निवर्तमान प्रधानों को ही गांव का प्रशासक नियुक्त कर दिया था।
सरकार के इस फैसले के खिलाफ प्रदेश भर के कई पूर्व जिला पंचायत सदस्य और ग्रामीणों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल की थीं। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि सरकार प्रधानों को प्रशासक बनाकर लोकतंत्र का गला घोंट रही है और चुनाव टाल रही है।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?*
कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद दो बड़े बिंदुओं पर फैसला दिया –
1. सरकार को राहत:* कोर्ट ने राज्य सरकार के 25 मई 2026 के शासनादेश को वैध बताया। कोर्ट ने कहा कि चुनाव होने तक गांव में विकास कार्य और प्रशासनिक कार्य न रुके, इसलिए निवर्तमान प्रधानों को प्रशासक के रूप में नियुक्त करना कानूनन सही है। इसलिए जो प्रधान प्रशासक बने हैं, वो अपने पद पर तब तक कार्य करते रहेंगे, जब तक नए चुनाव नहीं हो जाते।
2. सरकार को आदेश:* लेकिन साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि प्रशासक नियुक्त करना स्थायी व्यवस्था नहीं हो सकती। लोकतंत्र में चुनाव जरूरी हैं। इसलिए राज्य सरकार 3 महीने के भीतर राज्य निर्वाचन आयोग को सभी संसाधन, सुरक्षा और कर्मचारी उपलब्ध कराकर पंचायत चुनाव की प्रक्रिया पूरी कराए।
इस फैसले का क्या मतलब है?*
– गांव में अभी वही प्रधान जो प्रशासक बने हैं, वही काम देखते रहेंगे।
– लेकिन दिसंबर 2026 – जनवरी 2027 तक यूपी में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव (ग्राम प्रधान, बीडीसी, जिला पंचायत) होना तय हो गया है।
– सरकार अब चुनाव टाल नहीं सकेगी।
ये फैसला प्रदेश के करीब 58,000 ग्राम पंचायतों से जुड़ा है।
*रिपोर्ट – प्रयागराज संवाददाता*
*अपने अधिकार जानिए | 14 अक्टूबर 2026*