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श्रीमती मुन्नी देवी दीक्षित प्रधान संपादक
देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने देश की भलाई के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया। उनका सपना था कि इंटरनेट की सुविधा हर गांव, हर गली, हर मोहल्ले तक पहुंचे। हर व्यक्ति के हाथ में जानकारी हो, ताकत हो।
यह सोच अच्छी थी और आज भी अच्छी है।
इसका मकसद साफ था – ताकि लोगों की दिक्कतें तत्काल प्रभाव से उजागर की जा सकें, गांव की समस्याएं सीधे शासन-प्रशासन तक पहुंच सकें, सरकारी योजनाओं की जानकारी हर गरीब तक पहुंचे, और एक आम आदमी भी अपनी आवाज सीधे सरकार तक पहुंचा सके।
लेकिन आज हो क्या रहा है?
लोग इस सुविधा का गलत तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं। जिस इंटरनेट का इस्तेमाल शिक्षा, जानकारी और शिकायत के लिए होना था, उसका इस्तेमाल आज सिर्फ नाच-गाना करने में हो रहा है। कोई चूल्हे पर रोटी बनाते हुए वीडियो शेयर कर रहा है, कोई अंग प्रदर्शन करके व्यूज बटोर रहा है, कोई अपने ही घर के बुजुर्गों का मजाक बनाकर रील बना रहा है।
क्या इसी के लिए डिजिटल इंडिया का सपना देखा गया था?
इंटरनेट वरदान है, अगर उसका इस्तेमाल अच्छी सोच से किया जाए। यह पैसा कमाने की मशीन नहीं, बल्कि समस्याओं को उजागर करने का माध्यम है। जरूरत है कि हम युवाओं को समझाएं कि मोबाइल का कैमरा सिर्फ डांस दिखाने के लिए नहीं है, बल्कि अपने गांव की टूटी सड़क, खराब हैंडपंप, स्कूल की समस्या दिखाने के लिए भी है।
तभी प्रधानमंत्री जी की यह योजना सच में सफल होगी।