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लेखक= रोहतास दीक्षित उपसंपादक का निजी लेख है
आपने एक बार किसी मासूम बच्चे पर दया खाकर या भावुक होकर गलती से लाइक का बटन क्या दबा दिया, इंस्टाग्राम और फेसबुक के AI ने समझ लिया कि आप तो इसी मदरहुड कंटेंट के सबसे बड़े मुरीद हैं!
फिर क्या था, आपकी फ़ीड में रोज सुबह-शाम ऐसी रील्स की बाढ़ आ गई, मानो पूरा इंटरनेट ही स्तनपान केंद्र बन चुका हो।
अब आते हैं इस पूरे तमाशे के असली खेल पर। बात बहुत सीधी और साफ है – बच्चा भूखा है, तो माँ उसे कहीं भी दूध पिलाएगी, चाहे वह बस स्टैंड हो, रेलवे स्टेशन हो या कोई पार्क। यह एक स्वाभाविक, प्राकृतिक और ममता से भरा काम है, जिस पर किसी को कोई ऐतराज नहीं हो सकता।
लेकिन साहब, कमरे के कोने में, मोबाइल का फ्रंट कैमरा चालू करके, एंगल सेट करके, और बैकग्राउंड में कोई दुखी या रोमांटिक गाना सेट करके बच्चे को दूध पिलाते हुए रील बनाना… यह ममता कम और ‘व्यूज का धंधा’ ज्यादा लगता है!
बेचारा बच्चा तो सिर्फ अपनी भूख मिटाने आया था, उसे क्या पता था कि वह अपनी माँ के लिए 1080p रिज़ॉल्यूशन का ‘कंटेंट’ बन चुका है!
सोशल मीडिया पर लाइक और सब्सक्राइबर्स की ऐसी भूख लगी है कि अब ममता, वात्सल्य और निजता (Privacy) सब कुछ एल्गोरिदम की वेदी पर बलि चढ़ाया जा रहा है।
अंग प्रदर्शन और अश्लीलता की आड़ में मदरहुड का टैग चिपका देना आजकल का नया ट्रेंड बन गया है। जब कैमरे के सामने कैमरे का एंगल इस तरह रखा जाए कि ध्यान बच्चे के पेट भरने से ज्यादा शरीर के प्रदर्शन पर हो, तो इसे कोई भी बेहयाई और सरेआम फूहड़ता ही कहेगा।
मजे की बात यह है कि जब इन मैडमों से कोई सवाल पूछे, तो ज्ञान पेलने आ जाएँगी कि स्तनपान प्राकृतिक है, इसमें शर्म कैसी।
अरे माताजी, शौच जाना भी प्राकृतिक है, तो क्या लाइव स्ट्रीम चालू कर दोगी?
मासूम बच्चों को ‘लाइक बटन’ दबाने का औजार बना दिया गया है। बच्चा रोए या न रोए, कैमरा ऑन होते ही उसे गोद में चिपका लिया जाता है ताकि रीच मिल सके और दो-चार स्पॉन्सरशिप जेब में आ जाए। यह सीधा-सीधा बच्चे के नाम पर क्लिकबैट चलाना है।