1
1
स्वास्थ्य कर्मी घर बैठे ले रहे वेतन, जनता झोलाछाप डॉक्टरों के भरोसे*
श्रीमती मुन्नी देवी दीक्षित प्रधान संपादक
*एटा।* उत्तर प्रदेश सरकार भले ही ग्रामीणों को गांव में ही बेहतर इलाज देने का दावा कर रही हो, लेकिन एटा जिले के अलीगंज ब्लॉक की ग्राम पंचायत *बिछोरागंग* में यह दावा पूरी तरह फेल साबित हो रहा है। मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत लाखों रुपये की लागत से बना उप स्वास्थ्य केंद्र / आयुष्मान आरोग्य मंदिर आज सिर्फ शोपीस बना हुआ है।
ग्रामीणों का आरोप है कि अस्पताल का भवन तो करोड़ों की लागत से चमका दिया गया, अंदर बेड, जांच कक्ष सब बना है, लेकिन डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी कभी समय से नहीं आते। अब तो पूरा दिन ताला ही लटका रहता है।
“सरकार ने अस्पताल तो बनवा दिया, पर डॉक्टर भगवान भरोसे है। छोटी-सी खांसी-बुखार के लिए भी हमें अलीगंज या एटा जाना पड़ता है। मजबूरी में झोलाछाप डॉक्टरों से 200-300 रुपये में इलाज कराना पड़ता है।” – स्थानीय ग्रामीण
*कर्मचारी घर बैठे, जनता परेशान*
लोगों का कहना है कि यहां तैनात ANM, CHO और फार्मासिस्ट ज्यादातर घर पर ही रहते हैं। रजिस्टर में हाजिरी पूरी दिखा दी जाती है। प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं को भी यह कहकर वापस कर दिया जाता है कि यहां सुविधा नहीं है, जिला अस्पताल जाओ।
इसी लापरवाही का नतीजा है कि दो दिन पहले ही अलीगंज सीएचसी में सरकारी दवाएं जलाने का वीडियो वायरल हुआ था, जिसके बाद सीएमओ डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने रात में छापा मारकर 4 डॉक्टरों का वेतन रोक दिया था। और राजा का रामपुर पीएचसी में भी 2 कर्मचारी गैरहाजिर मिले थे।
मुख्यमंत्री के पैसे पर पानी*
बिछोरागंग में बना यह अस्पताल मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत ग्रामीणों को गांव में ही इलाज देने के लिए बनाया गया था, ताकि गरीबों को भटकना न पड़े। लेकिन रख-रखाव और कर्मचारियों की लापरवाही के कारण लाखों की इमारत जंगल में तब्दील हो रही है। अस्पताल परिसर में घास उग आई है, और अंदर कुत्ते बैठे रहते हैं।
*ग्रामीणों की मांग:*
1. बिछोरागंग अस्पताल में डॉक्टरों की स्थायी तैनाती हो और बायोमेट्रिक हाजिरी लगे।
2. जिलाधिकारी एटा और सीएमओ स्वयं औचक निरीक्षण करें।
3. लापरवाह स्वास्थ्य कर्मियों पर वेतन रोकने नहीं, बल्कि निलंबन की कार्रवाई हो।
4. झोलाछाप डॉक्टरों पर रोक लगे और सरकारी अस्पताल में दवा मिलना सुनिश्चित हो।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द व्यवस्था नहीं सुधरी तो वे तहसील मुख्यालय पर प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।