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रोहिताश दीक्षित, एटा।* अलीगंज विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और विधायक के विकास दावों की जमीनी हकीकत भी सामने आ रही है। जहां विधायक सत्यपाल सिंह राठौर सड़कों का जाल बिछाने का दावा कर रहे हैं, वहीं *ग्राम पंचायत बिछोर गंग में बना अस्पताल* उनके दावों की पोल खोल रहा है।
*बिछोर गंग में अस्पताल पर ताला, मरीज परेशान*
ग्रामीणों का आरोप है कि बिछोर गंग में लाखों की लागत से बने पंचायत अस्पताल का ताला तक नहीं खुलता। डॉक्टर समय पर नहीं आते, नर्स-स्टाफ नदारद रहता है। मजबूरी में मरीजों को 5-50 किलोमीटर दूर अलीगंज या एटा जाना पड़ता है।
स्थानीय लोगों ने बताया – “बिल्डिंग बनाकर छोड़ दी गई है। इमरजेंसी में कोई सुविधा नहीं मिलती, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा दिक्कत होती है।”
यह मुद्दा अब चुनाव में बड़ा बनता दिख रहा है। लोग पूछ रहे हैं कि जब सड़कों पर करोड़ों खर्च हो सकते हैं तो अस्पताल में डॉक्टर की तैनाती क्यों नहीं हो पा रही?
*विधायक का दावा Vs जमीनी हकीकत*
विधायक का दावा है कि उन्होंने –
– उभई-असदपुर, लखनपुरा-नगला चौहान, अलीगंज-कुरावली, जैथरा-पिंजरी समेत 50 से ज्यादा सड़कों का निर्माण/चौड़ीकरण कराया।
– 3.35 करोड़ से महिला थाना, कलिंजर में ITI, नगला पड़ाव में बस स्टैंड और 33 करोड़ से कंपोजिट विद्यालय बनवाया।
“विकास में कोई कसर नहीं छोड़ी, दुर्गम रास्ते दुरुस्त कराए हैं” – *सत्यपाल सिंह राठौर*
वहीं विपक्ष ने इसी को मुद्दा बनाया है। सपा जिलाध्यक्ष *परवेज जुबैरी* ने कहा – “बिछोर गंग अस्पताल इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। सड़कें गुणवत्ताविहीन हैं और स्वास्थ्य सुविधाएं तो कागजों पर ही हैं। अंतिम छोर के व्यक्ति को लाभ नहीं मिला।”
कुल 3,17,608 मतदाताओं वाली अलीगंज विधानसभा में अब बहस सिर्फ सड़क पर नहीं, *सड़क के साथ-साथ स्वास्थ्य सुविधा* पर भी होगी।