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लॉयर्स एसोसिएशन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को खुला पत्र लिखकर ‘आउट-ऑफ-टर्न लिस्टिंग’ और सुनवाई के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का ऑडियो म्यूट किए जाने पर आपत्ति जताई है। संगठन का कहना है कि मामले को विशेष ट्रीटमेंट देकर एक विशेष बेंच के सामने सूचीबद्ध किया गया, जिससे न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं। 4e709036
यह मामला दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा एक्टिविस्ट आकृति चौधरी की एनएसए हिरासत से जुड़ा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2 सितंबर को आकृति की एनएसए हिरासत रद्द करते हुए 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था, जो मेधा रूपम और अन्य अधिकारियों के वेतन से वसूलने को कहा था। e699
मेधा रूपम और यूपी सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। 23 सितंबर को जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने सुनवाई की। 18e9
शुरुआत में कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाई थी, लेकिन 24 सितंबर को आदेश को स्पष्ट करते हुए कहा कि रोक सिर्फ हाईकोर्ट की टिप्पणियों और 5 लाख मुआवजे वाले हिस्से (पैरा 27 से 33) पर है, आकृति चौधरी की रिहाई के आदेश पर नहीं। मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को होगी। 4e70
लॉयर्स एसोसिएशन ने पत्र में कहा है कि याचिकाकर्ता का सीईसी की बेटी होना और मामले को रोस्टर से अलग बेंच में लगाना सार्वजनिक संवेदनशीलता बढ़ाता है और गलत मिसाल बन सकता है। 4e70
*रिपोर्ट – रोहिताश दीक्षित, उप-संपादक, एटा*
*प्रधान संपादक – श्रीमती मुन्नी देवी दीक्षित, अपने अधिकार जानिए समाचार पत्र, अलीगढ (उ.प्र.)*