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लोकतंत्र के शरीर की हत्या? गांधी विचार से EVM और संविधान तक लूटप्रियता का खतरा – संपादकीय

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट और SIR, ECI-NET जैसे मुद्दों पर विशेष संपादकीय। क्या मतदाता सूची में हेराफेरी और तकनीक के जरिए लोकतंत्र के शरीर की हत्या हो रही है? पढ़िए अपने अधिकार जानिए का विश्लेषण

गांधी विचार के विरोधियों ने जिस तरह से गांधी के शरीर की हत्या की थी उसी तरह से लोकतंत्र के विरोधियों ने लोकतंत्र के शरीर की हत्या कर दी। हालांकि यह बात नेता प्रतिपक्ष और दूसरे तमाम पत्रकार और पूर्व अधिकारी लंबे समय से कह रहे थे लेकिन ‘इंडियन एक्सप्रेस’ अखबार की व्यवस्थित खोजी रपट के बाद शीशे की तरह साफ हो गई है।

नेता प्रतिपक्ष का यह सवाल बहुत वाजिब है कि लोकतंत्र में नेताओं की लोकप्रियता घटती बढ़ती रहती है

जाहिर है कि जिस तरह गांधी के शरीर की हत्या की गई थी वैसे ही लोकतंत्र के शरीर की हत्या में हिंदुत्व, पूंजीवाद और प्रौद्योगिकी ने सांठगांठ कर ली है।

लेकिन लोकतंत्र की भावना इस देश में मरी नहीं है जैसे कि गांधी का शरीर चला गया लेकिन उनका विचार किसी न किसी रूप में जिंदा रहा।

यह लेख प्रधान संपादक श्रीमती मुन्नी देवी दीक्षित जी के मार्गदर्शन में प्रकाशित संपादकीय विश्लेषण है।*

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