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मैं सुबह से देख रहा हूँ, मुंबई के लालबाग, पुणे, हैदराबाद, लखनऊ, पटना दिल्ली – हर जगह डीजे, ढोल, भंडारे और “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” के जयकारे हैं। लेकिन ट्विटर / X पर एल्गोरिदम सिर्फ वही दिखा रहा है जो सबसे ज्यादा लड़ाई वाला है – चुनाव आयोग, गिरफ्तारी, वोट चोरी।
इसीलिए आस्था की खबरें दब जा रही हैं – लोग अपने संस्कारों को भूल कर सिर्फ पार्टी वाला खून लेकर घूम रहे हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त का पद सच में स्वतंत्र संवैधानिक पद है , उस पर सवाल उठाना भी संविधान के दायरे में होना चाहिए, आज जो लाखों लोग श्रद्धा से बप्पा को विदा कर रहे हैं, उनकी खबर भी उतनी ही बड़ी है।
रोहतास दीक्षित उपसंपादक