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हैदराबाद से एक दिल दहला देने वाली तस्वीर सामने आई है। पत्रकार रेखा अपनी 5 महीने की मासूम बच्ची को गोद में लेकर 9 घंटे की पूछताछ के बाद पुलिस मुख्यालय से बाहर निकलती दिखीं।
*क्या था पत्रकार रेखा का गुनाह?*
उनका गुनाह सिर्फ इतना था कि उन्होंने गलत के खिलाफ आवाज उठाई थी। रेखा ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवन्त रेड्डी के कथित भ्रष्टाचार पर 2 मिनट का वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर डाला था।
पुलिस ने क्या किया?*
आरोप है कि इस वीडियो के बाद तेलंगाना की साइबर सेल पुलिस ने पत्रकार रेखा को पूछताछ के लिए बुलाया और पूरे 9 घंटे तक एक कमरे में बंद करके रखा। इस दौरान उनके साथ उनकी 5 महीने की मासूम बच्ची भी थी।
*दोहरे मापदंड पर सवाल*
अब कोई बुद्धिजीवी इस पर आवाज नहीं उठा रहा है। कोई नारीवादी संगठन इसको गलत नहीं बता रहा है, क्योंकि यह कार्रवाई कांग्रेस शासित राज्य में हुई है।
कल्पना करिए, अगर यही घटना किसी बीजेपी शासित राज्य में हुई होती, जहां किसी महिला पत्रकार को मुख्यमंत्री के खिलाफ वीडियो बनाने पर उसकी 5 महीने की बच्ची के साथ 9 घंटे तक पूछताछ के लिए बैठाया जाता, तो इस देश में क्या माहौल होता? पूरे देश में धरना-प्रदर्शन और प्रेस की आजादी पर बहस शुरू हो जाती।
प्रेस की स्वतंत्रता और महिला अधिकारों की बात करने वाले लोगों की इस चुप्पी पर अब सवाल उठ रहे हैं।
*रिपोर्ट: मुन्नी देवी दीक्षित*