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अपने अधिकार जानिए दैनिक – डेस्क
कार्तिक कृष्ण चतुर्थी, 29 अक्टूबर 2026*
करवा चौथ का त्योहार केवल एक व्रत नहीं, बल्कि पति-पत्नी के रिश्ते की मिठास और आपसी समर्पण का सबसे खूबसूरत उत्सव है। कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को सुहागिनें अपने हमसफर की लंबी उम्र और खुशहाली के लिए दिनभर अन्न-जल त्यागकर यह निर्जला व्रत रखती हैं।
*आइए जानते हैं कि इस खास रात को दंपत्ति मिलकर इस पावन पर्व को कैसे मनाते हैं:-*
1. शिव परिवार का वंदन*
चांद निकलने से करीब एक घंटा पहले, पति-पत्नी एक साथ बैठकर पूरे शिव परिवार – भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश जी, कार्तिकेय जी और नंदी जी – की पूजा-अर्चना करते हैं। इस दौरान पूजा की मूर्तियों का मुख पश्चिम दिशा की ओर और पत्नी का मुख पूर्व की तरफ होता है।
*2. छलनी से चांद और पिया का दीदार*
आसमान में चांद के आते ही सुहागिनें छलनी के पार पहले चंद्र देव का दर्शन करती हैं और फिर उसी प्यार और आस्था से अपने पति का चेहरा देखती हैं। यही इस व्रत का सबसे भावुक पल होता है।
*3. जल अर्पण और व्रत का पारण*
चांद को अर्घ्य देने के बाद पति प्रेमपूर्वक अपने हाथों से करवा के जल से पत्नी की प्यास बुझाते हैं और कुछ मीठा खिलाकर उनका व्रत खुलवाते हैं।
*4. चरण स्पर्श और तोहफों की बौछार*
व्रत खोलने के बाद पत्नी अपने जीवनसाथी के प्रति सम्मान और कृतज्ञता जताते हुए उनके पैर छूकर आशीर्वाद लेती है। जवाब में पति भी अपनी जीवनसंगिनी को प्यार से गले लगाकर ढेरों खुशियां और खूबसूरत उपहार सौंपता है।
*5. सास का आशीर्वाद और बड़ों का सम्मान*
पूजन के बाद बहुएं अपनी सास को मिठाई, फल, ड्राय फ्रूट और सुहाग सामग्री से सजी थाली भेंट कर उनसे ‘अखंड सौभाग्यवती’ होने का आशीष प्राप्त करती हैं।
*6. करवा माता की कथा और साथ में भोजन*
रात के अंतिम पड़ाव में पूरा परिवार एक साथ बैठकर करवा माता की पावन कथा सुनता है, आरती उतारता है और फिर खुशियों के साथ साथ बैठकर भोजन करता है।
यही तो है करवा चौथ की असली खूबसूरती – जहाँ व्रत तपस्या है तो तोहफा प्यार, और परंपरा ही उत्सव है।
*प्रकाशक:* प्रधान संपादक मुन्नी देवी दीक्षित, अपने अधिकार जानिए दैनिक, RNI 2013/53487
* उपसंपादक :* राजा दीक्षित, अलीगढ़