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राजा दीक्षित, उपसंपादक दिल्ली / धर्म-डेस्क
अलीगढ़, 29 अक्टूबर 2026*
करवा चौथ पर सबसे ज्यादा सुनाई जाने वाली *वीरवती की कथा* को लेकर अक्सर कहा जाता है कि यह वामन पुराण से है। लेकिन शास्त्रीय तथ्य कुछ और ही कहते हैं।
*1. व्रतराज क्या कहता है?*
*व्रतराज* ग्रंथ में वीरवती की कथा को वामन पुराण से संबंधित बताया गया है। यह संदर्भ वहाँ जरूर मिलता है।
*लेकिन असली पेंच यहीं है -*
*वामन पुराण के 1967 के आलोचनात्मक (Critical Edition) संस्करण* के संपादकों के अनुसार, यह वीरवती की कथा वामन पुराण की उपलब्ध किसी भी प्राचीन पांडुलिपि में नहीं मिली। इसलिए इसे वामन पुराण का प्रमाणित मूल पाठ कहना उचित नहीं होगा। यह बाद में जोड़ा गया प्रक्षिप्त अंश हो सकता है।
*2. नारद पुराण में क्या है?*
*नारद पुराण, पूर्व भाग, अध्याय 113, श्लोक 43-50* में *करक चतुर्थी के व्रत-विधान* का उल्लेख साफ मिलता है। वहाँ व्रत की विधि, महत्व बताया गया है, लेकिन *वीरवती की कथा का कोई उल्लेख नहीं है।*
3. तो निष्कर्ष क्या निकला?*
धार्मिक परंपरा में प्रचलित होना और प्राचीन पुराण में प्रमाणित रूप से लिखा होना – दो अलग-अलग बातें हैं।*
वीरवती की कथा का लिखित संदर्भ *व्रतराज में मिलता है* – यह सच है।
– लेकिन इसकी *वामन पुराण से संबद्धता प्रमाणित नहीं है* – यह भी सच है।
यदि कोई मूल प्रमाण देखना चाहे, तो *व्रतराज के 1897 के संस्कृत संस्करण के पृष्ठ 81-82* पर करक चतुर्थी की यह कथा देखी जा सकती है।
*सीधी बात:* लोक-परंपरा में वीरवती की कथा जीवित है, पूज्य है, लेकिन उसे सीधे “वामन पुराण में लिखा है” कहकर शास्त्रीय प्रमाण देना, शोध की कसौटी पर सही नहीं बैठता।
स्रोत:* वामन पुराण क्रिटिकल एडिशन 1967, नारद पुराण पूर्वार्ध 113/43-50, व्रतराज संस्करण 1897
*प्रकाशक:* प्रधान संपादक मुन्नी देवी दीक्षित, अपने अधिकार जानिए दैनिक