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चुनाव आयोग ने दाखिल किया विस्तृत हलफनामा, अब सबूतों की बारी
*नई दिल्ली, 28 अक्टूबर 2026
राहुल गांधी और कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष ने SIR (Special Intensive Revision) को लेकर महीनों तक सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक जमकर हंगामा किया। वोट चोरी के गंभीर आरोप लगाए गए, चुनाव आयोग को कटघरे में खड़ा किया गया और यहाँ तक कि मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग तक कर डाली गई।
लेकिन जब यही मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा तो तस्वीर बदल गई। माननीय सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई अब *17 नवंबर तक टल गई* है। विपक्ष की ओर से रिजॉइंडर दाखिल करने के लिए और समय मांगा गया, जबकि चुनाव आयोग ने अपने पक्ष में विस्तृत हलफनामा पेश कर अपने फैसलों की प्रक्रिया और पारदर्शिता को स्पष्ट किया है।
*सवाल तो उठेगा -*
महीनों तक सड़क पर सबूतों का शोर मचाने वालों को अदालत में अपनी ही बात रखने के लिए और वक्त क्यों चाहिए? प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाना आसान है, लेकिन अदालत में उन आरोपों को दस्तावेजों और कानून की कसौटी पर साबित करना बिल्कुल अलग बात है।
चुनाव आयोग ने अपने हलफनामे में साफ किया है कि उसके सारे फैसले नियमानुसार और पारदर्शी प्रक्रिया से लिए गए हैं। अब अदालत में दोनों पक्षों की दलीलों की गहन जांच होगी।
राजनीति का पैटर्न?*
जनादेश नहीं मिला तो संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल, चुनाव में हार हुई तो वोट चोरी का आरोप, और फिर इस्तीफे की मांग! आखिर कब तक यही राजनीति चलेगी?
लोकतंत्र में सवाल उठाना हर किसी का अधिकार है, लेकिन हर आरोप को सच मान लेना जरूरी नहीं। अदालत में फैसला नारों, भाषणों और ट्वीट से नहीं, बल्कि सबूतों और कानून से होगा।
अब सबकी निगाहें 17 नवंबर की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहाँ देखना होगा कि विपक्ष अपने बड़े-बड़े आरोपों के समर्थन में अदालत के सामने क्या ठोस तथ्य पेश करता है। क्योंकि सड़क पर राजनीतिक बवंडर खड़ा करना आसान है, लेकिन अदालत में तथ्यों की कसौटी पर टिकना ही असली परीक्षा है।
*लेखक / विश्लेषण:* प्रधान संपादक मुन्नी देवी दीक्षित
*प्रकाशक:* अपने अधिकार जानिए दैनिक, 9458031160,79006 46571
*स्थान:* ग्राम गोपी, अकराबाद, अलीगढ़