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आज एक बड़ा सवाल मन में आता है। 2014 से पहले क्या इस देश में मुगलों का शासन था या अंग्रेजों का शासन था, जो अब आकर हर जगह सिर्फ हिंदू-हिंदू किया जा रहा है?

2014 से पहले भी यही देश था, यही हिंदू थे, यही मंदिर थे, यही त्योहार थे। लेकिन तब विकास की बात होती थी – स्कूल, अस्पताल, नौकरी, सड़क, बिजली, पानी की बात होती थी।

आज उत्तर प्रदेश में विकास की कोई बात नहीं हो रही है। सिर्फ जातीय बंटवारे पर बात हो रही है। कभी अगड़ा-पिछड़ा, कभी दलित-ब्राह्मण, कभी यादव-ठाकुर, कभी जाटव-वाल्मीकि करके हिंदुओं को ही जातियों में बांटा जा रहा है।

हिंदू-हिंदू का नारा देकर असल में हिंदुओं को ही आपस में लड़ाया जा रहा है ताकि असली मुद्दों – महंगाई, बेरोजगारी, गन्ना भुगतान, शिक्षा, स्वास्थ्य से ध्यान भटकाया जा सके।

उत्तर प्रदेश को विकास चाहिए, नफरत नहीं। रोजगार चाहिए, जातीय जनगणना का झगड़ा नहीं। जनता अब समझने लगी है कि जाति में बांटो और राज करो, यही अंग्रेजों की नीति थी और वही नीति आज अपनाई जा रही है।
रोहतास उर्फ अजय दीक्षित