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अलीगढ़।* अलीगढ़ मंडल में इन दिनों तथाकथित बड़े तांत्रिकों की एक पूरी मंडली सक्रिय है। भोले-भाले ग्रामीणों को भूत-चुड़ैल, जिन्न-जिन्नात का डर दिखाकर शक्तियों के प्रदर्शन के नाम पर अंधविश्वास का बड़ा बिजनेस चलाया जा रहा है।

*’अपने अधिकार जानिए’ को मिली जानकारी के अनुसार -*
*1. डर का धंधा:* मंडली का तरीका एक ही है – अगर किसी ने इनके खिलाफ आवाज उठाई या अखबार में खबर प्रकाशित की, तो उस व्यक्ति के घर पर भूत-चुड़ैल छोड़ देने की धमकी। व्हाट्सएप और फेसबुक पर अपनी “शक्तियों” के वीडियो वायरल कर दहशत बनाई जाती है।
*2. गोपी गांव की घटना:* बताया जा रहा है कि गोपी गांव के एक व्यक्ति ने जब इनका विरोध किया तो उसके घर पर तांत्रिक क्रिया करके भूत भेजने का दावा किया गया। पूरा घर आज भी दहशत में है।
*3. सवाल जो सरकार से पूछे जाने चाहिए:*
– अगर इनके पास वाकई इतनी शक्तियां हैं, तो ये शक्तियां लोगों की भलाई में क्यों नहीं लगाते?
– सीमा पर आतंकवादियों को क्यों नहीं पकड़ते? जिले में हो रही चोरी, लूट का असली लुटेरा कौन है, ये पुलिस को क्यों नहीं बताते?
– अगर शक्ति है तो क्षेत्र में पुलिस का सहयोग क्यों नहीं करते?
*4. असली खेल – राजनीतिक संरक्षण:* स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन तांत्रिक मंडलियों को क्षेत्र के कुछ राजनीतिक दबंगों का संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण कोई भी इनके खिलाफ बोलने की हिम्मत नहीं करता।
कानून क्या कहता है?*
भारत में *औषधि और चमत्कारिक उपचार (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम 1954* और *भारतीय न्याय संहिता की धारा 351 (आपराधिक धमकी)* के तहत भूत-प्रेत के नाम पर डराना, ठगना दंडनीय अपराध है। उत्तर प्रदेश में भी अंधविश्वास के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश हैं।हमारी मांग:*
– अलीगढ़ मंडल के डीआईजी और एसएसपी को इस पूरे तांत्रिक नेटवर्क की जांच करनी चाहिए।
– अगर इनके पास वाकई शक्ति है, तो सरकार को इन्हें पुलिस के सहयोग के लिए इस्तेमाल करना चाहिए – चोरी का खुलासा, अपराधी की पहचान में।
– नहीं तो ऐसे अंधविश्वास फैलाने वाले ठग मंडली के फेसबुक-व्हाट्सएप प्रचार पर रोक लगाकर कार्रवाई होनी चाहिए।
*ये धर्म नहीं, धंधा है। आस्था के नाम पर भय का व्यापार बंद होना चाहिए।*
*- विशेष खोजी रिपोर्ट, मुन्नी देवी दीक्षित *
*अपने अधिकार जानिए |
यह रिपोर्ट स्थानीय ग्रामीणों से प्राप्त शिकायतों और सोशल मीडिया (Ranjeet Singh Facebook ID) पर उपलब्ध फोटो/वीडियो के विश्लेषण पर आधारित है। किसी भी व्यक्ति विशेष पर आरोप सिद्ध नहीं करता, पुलिस जांच ही सच सामने लाएगी।*