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सड़क पर पैदल चलने वालों के लिए बिना अतिक्रमण वाली जगह सुनिश्चित करें= सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया देशभर की हर सड़क पर पैदल चलने वालों के लिए बिना अतिक्रमण बाली जगह सुनिश्चित करें

जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने केंद्र की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज से कहा कि वे अधिकारियों को पैदल चलने वालों के लिए जगह तय करने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दें कि उस जगह पर कोई अतिक्रमण न हो।

पीठ ने कहा, “बिना किसी बड़े निवेश या निर्माण के, बस यह पक्का करें कि पैदल चलने वालों की जगह को ठीक से अलग किया जाए। जहाँ भी सड़क हो, वहाँ पैदल चलने वालों के लिए जगह होनी चाहिए। इसे रस्सी या किसी भी चीज़ से करें और पक्का करें कि उस पर कोई अतिक्रमण न हो।” बेंच ने मामले की अगली सुनवाई के लिए दो हफ़्ते का समय तय किया।

इससे पहले 19 जुलाई के अपने फ़ैसले में पीठ ने कहा था कि तय फुटपाथ पर चलने का नागरिक का मौलिक अधिकार सबसे ज़रूरी है और इसे मोटर गाड़ियों की आवाजाही से ज़्यादा प्राथमिकता दी जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा था, “यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 19(1)(डी) के तहत गारंटीकृत आवाजाही के अधिकार का अहम हिस्सा है, जिसे अनुच्छेद 19(1)(ए), 19(1)(बी), 19(1)(सी) और आर्टिकल 21 के साथ पढ़ा जाना चाहिए। पैदल चलने के मौलिक अधिकार में तय फुटपाथ का अधिकार भी शामिल है।”

कोर्ट ने मोटर दुर्घटना के दावे से जुड़ी एक अपील पर फ़ैसला सुनाते हुए ये टिप्पणियाँ और घोषणाएँ कीं। शीर्ष अदालत ने यह फ़ैसला एक दुखद घटना से जुड़े मामले में सुनाया, जिसमें एक टैंकर ने 5 साल के बच्चे को टक्कर मार दी थी, जब वह अपने पिता के साथ स्कूल जा रहा था।

इसके बाद पिता ने 25,00,000 रुपये के मुआवज़े के लिए मोटर एक्सीडेंट्स क्लेम ट्रिब्यूनल में याचिका दायर की, लेकिन ट्रिब्यूनल ने 6% ब्याज के साथ केवल 7,82,000 रुपये का मुआवज़ा दिया। इसके बाद, दोनों पक्षों ने अपील दायर की और हाई कोर्ट ने मुआवज़े की रकम को और कम करके 4,70,000 रुपये कर दिया। फिर पिता ने सही आदेश और मुआवज़े के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया।

तब सुप्रीम कोर्ट ने मामले में दखल दिया और हाई कोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि पिता 11,44,628 रुपये का मुआवज़ा पाने के हकदार हैं, जिसका भुगतान 2 महीने के भीतर किया जाना चाहिए।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और कानूनी मामलों के जानकार हैं।)

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