Popular Posts

संकट चौधरी ने काट पंडितजी का संकट

रोहिताश दीक्षित उपसंपादक 

गांव में कोई न कोई ऐसा आदमी जरूर होता है जब किसी को कोई रास्ता घाट नहीं मिलता तो उस आदमी के पास जाते हैं और वो कोई न कोई रास्ता निकाल ही देता है। इसी प्रकार एक गांव में एक चौधरी साहब थे काम धाम कुछ करते नहीं थे मगर रास्ता जरूर निकाल देते थे गांव वालों ने उनका नाम संकट चौधरी निकाल छोड़ा था कि भाई कोई भी समस्या हो संकट चौधरी के पास जाओ।

एक बार एक पंडित जी चौधरी सहाब के यहां आया और बोला कि चौधरी साहब गांव का कोई भी व्यक्ति कुछ भी काम करने से पहले आपकी राय लेता है, मुझे तीर्थ यात्रा पर जाना है कुछ तो पैसे दे दो, एक घोड़ी दे दो और मुझे सही रास्ता बता दो ताकि मैं नहाकर वापस आ सकूं।

संकट चौधरी ने कहा कि भाई पैसे तो गांव वाले देंगे हां मेरी घोड़ी ले जा, पूरा रास्ता साफ है लेकिन एक गांव ठगों का आएगा बड़े मीठे बोलेंगे और तुझे लूट लेंगे, तेरी तीर्थ यात्रा पूरी नहीं होगी और तू वापस ही आएगा, क्योंकि तू एक शरीफ आदमी है ज्यादा स्यानापन तुझमें नहीं है।

पंडितजी ने कहा कि चौधरी साहब मैं ध्यान रखुंगा। गांव वालों से पैसे लेकर वो संकट चौधरी की घोड़ी पर सवार हो गया चल पड़ा, क‌ई गांव पार करके वो थक गया, पहले गांवों में ही रूकते थे तो एक गांव में जाकर घोड़ी रोकी रूकते ही उसकी घोड़ी की लगाम पकड़ ली और बोले कि पंडितजी तीर्थ यात्रा पर जा रहे हैं हमारे गांव से ऐसे नहीं जा सकते आज रात आपकी सेवा हम करेंगे।

गांव वालों ने पंडितजी की खूब सेवा की, अच्छा खीर और चुरमा खिलाया सोने से पहले चुटकुलों की गोष्ठी हुई इसके बाद पंडितजी सो गए। पंडितजी सुबह उठे तो तकिए के नीचे पैसे रखे थे वो संभाले तो वहां कुछ नहीं, घोड़ी जहां बांधी थी वो घोड़ी गायब।

गांव वालों से पूछा तो वे बोले कि पंडितजी हमें यहां रहते सारी उम्र बीत ग‌ई मगर आजतक घोड़ी नहीं देखी, पंडितजी बोले कि अरे तकिए नीचे पैसे रखे थे वो कहां गए? बोले कि जी हमारे गांव में तो कभी चवन्नी की भी आवाज नहीं हुई आप गांव को बदनाम मत करो। ठगों का गांव था वे कैसे हामी भरते? पंडितजी ने खूब कहा कि अरे घोड़ी रख लो मगर पैसे तो लौटा दो कम से कम मैं तीर्थ तो हो आऊं। मगर किसी ने न सुना और बगैर घोड़ी और पैसे पंडितजी वापस गांव लौट आए।

संकट चौधरी बैठे हुए हुक्का पी रहे थे बोले हां पंडित जी कर आए तीर्थ?, पंडितजी बोले कि कहां चौधरी सहाब वही बन गई जो आप समझा रहे थे। संकट चौधरी सारी बात समझ ग‌ए और बोले कि कोई बात नहीं कुछ दिन बाद तीर्थ यात्रा कर आना। संकट चौधरी को संकट में काम आना ही आना, तो वे एक मरीयल सी घोड़ी लेकर उस गांव की तरफ बढ़ चले।

उस गांव में पहुंचे तो उल्टी तरफ मुंह करके बैठ ग‌ए और लगाम घोड़ी की पूंछ से बांध ली, गांव वालों ने जब देखा कि ये बड़ा चौधरी आ रहा है और ये तो मुर्ख भी लगता है उल्टा बैठा है घोड़ी पर, इसे बेवकुफ बनाना तो बाएं हाथ का खेल है।

गांव वालों ने उसकी भी खूब सेवा की, बिल्कुल वही पंडितजी वाला पैटर्न। संकट चौधरी के सोने के बाद तलाशी ली गई तो उसके सामान में कुछ नहीं मिला, जिसने खीर और चुरमा बनवाया था उसने भी माथे पर हाथ मारा। घोड़ी इतनी मरीयल की कोई गांव वाला लेने को राजी नहीं वो कोई काम की ही नहीं।

गांव वालों के जागने से पहले ही संकट चौधरी जाग गया उसने अपनी पगड़ी में छिपाकर रखी कुछ मुद्रा बाहर निकाली और घोड़ी की लीद में मिला दीं। सवेरे गांव वाले उठे तो संकट चौधरी ने कहा कि भाई एक तसला लाओ, गांव वालों ने तसला दे दिया तो उसने तसले में लीद भर ली और जिस घर में रूका था उनसे कहा कि भाई बहुत सेवा की बिल्कुल आनंद आ गया भगवान तुम्हें बरकत दे मैं अब चलता हूं। पैसे तो थे नहीं मरीयल घोड़ी का करते क्या तो गांव वाले बोले कि ठीक है चौधरी सहाब जाओ।

चौधरी ने जाते हुए लीद का भरा तसला घोड़ी की पीठ पर रख लिया, गांव वालों ने पुछा कि जी इस लीद का क्या करोगे? चौधरी ने कहा कि भाई ये भी भगवान की करामात है चलो कुंए पर वहां दिखाता हूं। गांव वालों को लेकर कुंए पर गया तो पानी से लीद धोने लगा लीद पीघलकर साफ हो गई और उसमें रखीं मुहरें साफ झलकने लगी। बोला कि तुम क्या समझते हो इस मरीयल घोड़ी को ऐसे ही लिए घुमता हूं? ये रोज रात को लीद में सोने की मुहरें देती है।

पहले से ही लुटेरा गांव उन्होंने जब लीद से पैसे निकलते देखे तो लालच में आ गए बड़े बुड्ढों ने बैठकर फैसला किया कि किसी भी तरह ये घोड़ी खरीद लेनी चाहिए रात होती तो कोई परेशानी नहीं थी लेकिन अब दिन है और ये जाने को तैयार है अतः देर न करो, कहकर वे संकट चौधरी से बोले कि चौधरी सहाब ये घोड़ी बेच लो।

चौधरी ने कहा कि भाई मेरी उम्र हो गई और इस घोड़ी ने मुझे बहुत पैसा दे दिया बेच तो दूंगा मगर मुझे तीर्थ करने के लिए कोई तो घोड़ी चाहिए ही? गांव वालों ने एक सुर में कहा कि पूरे गांव में से कोई भी घोड़ी छांट लिजिए। संकट चौधरी ने गांव की सबसे अच्छी घोड़ी छांट ली और कहा कि भाई 2000 मोहरें भी दो तीर्थ में कुछ दान पुन भी करूंगा। 2000 मुहरें बहुत ज्यादा थीं लेकिन पूरे गांव में से इकट्ठा करके चौधरी सहाब को दी गई।

संकट चौधरी वापस गांव लौटे और पंडितजी के जितने पैसे उस गांव वालों ने लुटे थे वापस दिए बाकी पास रखे और घोड़ी अपने खूंटे से बांध दी।

उधर ठग रात होने की बाट देख रहे कि कब ये लीद करेगी और पैसे आएंगे, रात में ठग जितनी बार भी घोड़ी लीद करती उसे तसले में इकट्ठा करते गए सुबह लीद धोई गई तो उसमें से क्या निकलता? वो मुहरें तो संकट चौधरी ने रात में मिला दीं थीं। तब गांव वालों को पता चला कि संकट चौधरी हमारा ही संकट काट गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *