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2 अक्टूबर 1994 की वो घटना जिसे आज *रामपुर तिराहा कांड* कहा जाता है।

क्या हुआ था उस रात:

श्रीमती, मुन्नी देवी दीक्षित, प्रधान संपादक, अलीगढ़?

*1. पृष्ठभूमि:* उत्तराखंड राज्य की मांग को लेकर छात्र, महिलाएं, कर्मचारी देहरादून/ऋषिकेश से बसों में 1 अक्टूबर की रात दिल्ली में 2 अक्टूबर को राजघाट पर धरने के लिए निकल रहे थे। 9df1

*2. रोक और फायरिंग:* मुजफ्फरनगर बाईपास पर रामपुर तिराहा पर यूपी पुलिस ने उन्हें रोक दिया। प्रशासन का कहना था कि दिल्ली पुलिस और गृह मंत्रालय के इनपुट पर हथियार चेकिंग के लिए रोका गया था। भीड़ और पुलिस में झड़प हुई, पथराव का आरोप लगा और फिर पुलिस फायरिंग हुई। 0cdc

3. हताहत:* इस फायरिंग में 6 आंदोलनकारियों की मौत की पुष्टि हुई, कई घायल हुए। आधिकारिक तौर पर शहीदों में रविंद्र रावत, सतेंद्र चौहान, गिरीश भद्री, राजेश लखेड़ा आदि के नाम लिए जाते हैं। 92bf

4. महिलाओं से अभद्रता के आरोप:* फायरिंग के बाद अफरा-तफरी में कुछ महिला आंदोलनकारियों के साथ छेड़छाड़ और बलात्कार के गंभीर आरोप लगे। आंदोलनकारियों का कहना था कि कई महिलाएं जान बचाने के लिए पास के गन्ने के खेतों में भागी थीं। 16ca

*5. जांच:* उस समय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव थे। राज्य सरकार ने जस्टिस जहीर हसन से न्यायिक जांच कराई, जिसने “बल प्रयोग उचित” बताया। दूसरी तरफ इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर CBI जांच हुई, CBI ने 28 पुलिसकर्मियों पर रेप, लूट, आपराधिक साजिश सहित केस दर्ज किए। CBI का आरोप था कि पुलिस ने जानबूझकर उकसाया और फिर फायरिंग की। 9df192bf0cdc

*6. न्याय:* इस मामले में आज तक किसी बड़े अधिकारी या राजनेता को सजा नहीं हुई है। कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई, पर बाद में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उसे रद्द कर दिया और मुकदमे लंबे समय तक खिंचते रहे। 16ca

हर साल 2 अक्टूबर को मुजफ्फरनगर के शहीद स्थल पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्रद्धांजलि देते हैं और इसे उत्तराखंड के संघर्ष के बलिदान के प्रतीक के तौर पर याद किया जाता है।

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