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मुन्नी देवी दीक्षित प्रधान संपादक
नई दिल्ली / अलीगढ।* AI के आने के बाद देश के बड़े-बड़े न्यूज़ चैनलों और अखबारों के दफ्तरों में खलबली मच गई है। जो खबरें कभी बड़े AC स्टूडियो से तय होती थीं, आज वही खबर एक गांव का गरीब, अनपढ़ आदमी भी अपने मोबाइल से बना कर वायरल कर दे रहा है।
मोदी के इस डिजिटल इंडिया वाले दौर में अब पत्रकारिता सिर्फ डिग्री वालों की जागीर नहीं रही। अब हाथ में मोबाइल है तो हर व्यक्ति पत्रकार है।
*इसका सबसे बड़ा असर क्या होगा?*
अब गांव के प्रधान से लेकर विधायक और सांसद तक के विकास का काला चिट्ठा खुलेगा। पहले जहां प्रधान की नाली, विधायक की सड़क और सांसद की निधि की खबरें बड़े अखबारों में दबा दी जाती थीं, अब AI की मदद से वही गरीब आदमी फोटो खींचकर, वीडियो बनाकर सीधे जनता तक पहुंचा देगा।
AI धीरे-धीरे देश का सबसे बड़ा मीडिया हब बनता जा रहा है। न कोई मालिक, न कोई संपादक का दबाव — सीधा जनता की बात, जनता तक।
वहीं दूसरी तरफ, देश की सुप्रीम कोर्ट की लगातार फटकार के बाद पुलिस व्यवस्था में भी बड़े बदलाव की चर्चा है। जिस तरह सेना में अग्निवीर योजना आई, उसी तरह अब पुलिस भी अग्निवीर जैसी चुस्त, जवाबदेह और कम समय की सेवा वाली होने जा रही है। जनता अब थाने में बैठी पुलिस नहीं, जमीन पर दौड़ती पुलिस देखना चाहती है।
कुल मिलाकर AI ने एक बात साफ कर दी है — अब खबर दबेगी नहीं, चाहे वो प्रधान की हो या सांसद की।